तेरे दीदार ने उलझा दिया मुझको सवालो में
क्या मैने चांद देखा है इन्ही दिन के उजालो मे ?
कि यूं ही आ गईं जुल्फें तेरे रुखसार पे शायद
महक सी छा गई पैहम मेरे तनहा खयालो मे
मुसलसल पी लिया जाम नजरे इनायत का
तभी से आ गई मस्ती मेरी संजीदा चालों मे

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sanjaydixitsamarpit द्वारा

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