किस मोड़ पे मिलना है….

खयालों की रंगी तितलियों ने
न जाने फिर से क्यूं पंख खोले ?
ये जिस्मो जा क्यूं महक चला है ?
आवारा यादों से हौले हौले
कोई कहानी
जो लिखते लिखते
ठहर गई थी,चल रही है
बेचैन शब की
करवटें क्यूं
मिजाज अपना बदल रही है
दबी हुई थी
खाक बनकर
धुंआ उठा क्यूं,तपिश हुई क्यूं ?
तनहाइयां
आशना हो चली थीं
कोई सदा कर रही दिल्लगी क्यूं ?
ये लम्बी रातों की सुब्ह आकर
कैसी खूशबू फिजा मे घोले ?
खयालों की रंगी तितलियों ने
न जाने फिर से क्यूं पंख खोले ?
ये जिस्मो जा क्यूं महक चला है ?
आवारा यादों से हौले हौले