ये कविता नही है —

रात का दूसरा प्रहर
अशांत क्षेत्र घोषित इलाके का थाना
एक पुलिस अफसर
टार्चर रूम मे बन्दी औरत
पूछताछ,गालियां,लहूलुहान जिस्म
“मुझे मार क्यूं नही देते ? ”
“एनकाउन्टर तो जानेमन
कर ही डालते तुम्हारा,मगर
मजबूर हैं,कोर्ट से कस्टडी मे जो मिली हो
खैर तुम्हें जिन्दा लाश तो बना ही देंगे
खुद पर थूकोगी शर्म से ”
चीरहरण
“कहां हो कृष्ण बचा लो मुझे ”
कृष्ण को सुनाई नही दिया
अन्ततः
निर्वसन
लहुलुहान यौनांग की दहलीज पर
लोकतन्त्र,गणतन्त्र,मौलिक अधिकार
सनातन संस्कृति,विरासत
विश्व गुरू भारत
नंगा हो नर्तन
मान मर्दन मान मर्दन
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सुबह का अखबार
रिलायन्स का बारह हजार
करोड़ का कारोबार
विद्या बालन के
ठुमको की बहार
प्रधान मन्त्री की यात्रा
विदेश व्यापार
अग्नि मिशाइल
पाकिस्तान लाचार
मर्दाना ताकत
विग्यापन बेशुमार
सुबह का अखबार
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रात वाली खबर
सम्पादक का कमरा
डस्टबिन की शोभा
अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता
रिपोर्टर को फटकार
व्यवसायिक उपचार

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